SUCCESS STORY: किसान की बेटी ने किया कमाल, सीडीएस में हासिल की छठवीं रैंक

0
29


कहते हैं इंसान की उड़ान पंखों से नहीं हौंसलों से होती है और हौसला रखने वालों की कभी हार नहीं होती. कुछ ऐसा ही कर दिखाया है उत्‍तर प्रदेश के एक किसान की बेटी ने. मेरठ के भराला गांव रहने वाली आकांक्षा ने वह कर दिखाया जो कई साल से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले नहीं कर पाए. आकांक्षा ने सीडीएस (कबाइंड डिफेंस सर्विसेज) में देश भर में छठवीं रैंक हासिल की है.

ग्रेजुएशन में महज 58% अंक
जूलॉजी, बॉटनी, केमिस्ट्री से बीएससी करने वाली आकांक्षा ने ग्रेजुएशन में महज अट्ठावन फीसदी पाए थे. साथ ही उसने सीडीएस की परीक्षा कई बार दी, लेकिन क्वालिफाई नहीं कर पाई. मेरठ के आरजीपी कॉलेज से पढ़ने वाली आकांक्षा को योगी सरकार की अभ्युदय योजना का खासा लाभ हुआ. आकांक्षा ने बताया कि कोविड के समय से ही सरकार की इस योजना का सहारा लिया और आज उन्होंने कामयाबी हासिल कर ली. इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने के लिए आकांक्षा ने 2 घंटे इंग्लिश तथा 2 घंटे फ्री यूट्यूब चैनल के जरिये भी तैयारी की. आकांक्षा ने साथ साथ जॉब भी की क्योंकि घर की आर्थिक स्थितियां खऱाब थीं. आकांक्षा का कहना है कि पीएम नरेन्‍द्र मोदी के दिए सफलता के मंत्र ‘जीत से ही नहीं, हार से भी सीखना चाहिए’ से भी उन्‍हें प्रेरणा मिली. अब देशभर में आकांक्षा ने सीडीएस में छठवीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया है.

जॉब भी करती थी आकांक्षा 
आकांक्षा बताती हैं कि देशसेवा करना उनके लिए फक्र की बात होगी. आकांक्षा के दो छोटे भाई हैं और पिता किसान हैं. आकांक्षा के पिता पहले एक प्राइवेट जॉब करते थे, लेकिन कोरोनाकाल में उनकी नौकरी चली गई. बेटी के सपनों को उन्होंने हमेशा उड़ान दी और इस बिटिया ने सीडीएस परीक्षा में छठवीं रैंक हासिल कर कामयाबी की कहानी लिख दी. आकांक्षा अपनी कामयाबी का श्रेय रिटायर्ड कर्नल राजीव देवगन को भी देती हैं. साथ ही आकांक्षा ने अपनी कामयाबी के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मेरठ के कमिश्नर सुरेंद्र सिंह, जिलाधिकारी दीपक मीणा, मुख्य विकास अधिकारी शशांक चौधरी, कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ मेघराज सिंह तथा शिक्षक भूपेंद्र सिंह तोमर के प्रति आभार जताया है. मेरठ की अपर आयुक्त चैत्रा वी , जॉइंट मजिस्ट्रेट जागृति अवस्थी जिला समाज कल्याण अधिकारी सुनील सिंह ने आकांक्षा को शुभकामनाएं दी है.

ये भी पढ़ें:
BHEL Sarkari Naukri: BHEL में इन पदों पर निकली बंपर वैकेंसी, आवेदन प्रक्रिया शुरू, 1.80 लाख मिलेगी सैलरी
हिंदी दिवस: तेलुगू भाषी ने बना दिया हिंदी का ऐसा संस्‍थान, जहां विदेशी भी आते हैं पढ़ने

मेरठ बना पहला मंडल
मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के अंतर्गत मेरठ मंडल उत्तर प्रदेश का पहला मंडल है, जहां से सर्वाधिक छात्र-छात्राओं का चयन हुआ है. 184 से अधिक छात्र-छात्राएं अपनी मंजिल को प्राप्त कर चुके हैं.

Tags: Career, Meerut news, Success Story

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here