Pithoragarh: उत्तराखंड का ऐसा शहर जहां नेपाल में भी आराम से गुजार सकते हैं शाम, जानें कैसे

0
23


हिमांशु जोशी

पिथौरागढ़. उत्तराखंड राज्य देश के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले हिल स्टेशनों में से एक है. वहीं, मॉनसून को छोड़ दिया जाए तो उत्तराखंड में हर दिन हजारों सैलानी घूमने के लिए पहुंचते हैं. इस बीच आज हम बात करने वाले हैं उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में स्थित धारचूला शहर के बारे में, जो अपने में एक विशेष सामरिक महत्व रखता है. यह भारत देश की अंतिम तहसील भी है.

धारचूला नेपाल से सटा हुआ इलाका है और चीन बॉर्डर के करीब है, जिसका मुख्यालय पिथौरागढ़ है. यहां की नदियों और हिमालय का दीदार करने लोग देश विदेश से पहुंचते हैं. पिथौरागढ़ से हिमालय की सैर को आए यात्रियों का धारचूला अहम पड़ाव है क्योंकि यही से होकर कैलाश मानसरोवर जाया जाता है. इसके अलावा धारचूला आने वाले पर्यटक यहां दो देशों की मिली जुली संस्कृति भी देख सकते है. यहां आने वाले भारतीय पर्यटक आसानी से नेपाल जा सकते हैं और दो देशों के बीच भाईचारे वाली भावनाओं के साथ ही रोटी-बेटी के संबंध देखने को मिलते हैं.

जानें क्‍यों कहते हैं रं लैंड?
धारचूला को रं लैंड भी कहा जाता है. यह हिमालयी इलाकों में रहने वाले रं समुदाय लोगों का इलाका है जो सर्दियों में हिमालय छोड़ कर नीचे धारचूला आ जाते हैं. अगर आप धारचूला आये हैं और नेपाल जाना चाहते तो इसके लिए आपने अपना आधार कार्ड दिखा कर बस एक पुल पार करना है जो कि काली नदी पर बना है. काली नदी ही यहां दो देशों का विभाजन करती है,जिसे पार करते ही नेपाल के दार्चुला शहर पहुंचा जाता है. यहां से काठमांडू की दूरी 960 किलोमीटर है. खास बात ये है कि यहां के लोगों की सुबह भारत मे होती हैं तो शाम नेपाल में. वहीं, दोनों देशों के लोग एक दूसरे पर निर्भर रहते हैं, वो चाहे वह व्यापार जो या रोटी बेटी के संबंध.

Tags: Indo-Nepal Border, Pithoragarh news



LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here