Navratri 2022: बिहार के इस काली मंदिर की अनोखी तंत्र साधना, बलि के बाद माता को लगता है मांसाहारी भोग

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रिपोर्ट: अभिनव कुमार

दरभंगा: नवरात्रि के 9 दिन काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. इस 9 दिन में माता की विभिन्न तरह से पूजा अर्चना की जाती है. आमतौर पर वैष्णवी विधि से मां भगवती की पूजा अर्चना सभी जगह की जाती है, लेकिन दरभंगा जिले के सैदनगर स्थित काली मंदिर में तांत्रिक विधि से पूजा होती है. यहां देशों और विदेश से साधक आते हैं. देशभर में जहां-जहां मां भगवती की शक्ति उपासक केंद्र है. उन सभी जगहों पर उपासक अपनी तांत्रिक विधि से उपासना करते हैं. उसी में से एक यह भी है. जहां पड़ोसी देश नेपाल और बिहार से सटे राज्य जैसे झारखंड, पश्चिम बंगाल, आसाम इन तमाम जगहों से तांत्रिक से लेकर उपासक तक यहां तंत्र विद्या को सिद्ध करने आते हैं. यहां 9 दिन तक कठोर साधना की जाती है. उन साधकों के रहने की सारी व्यवस्था मंदिर प्रशासन की होती है.

आमतौर पर माना जाता है कि पूजा पाठ के दौरान मांसाहारी भोजन से लोग कोसों दूर होते हैं. इसे अछूत मानते हैं, लेकिन इस जगह पर मां काली को नवरात्रि के 3 दिन मांसाहारी भोग लगाए जाते हैं. यह अपने आप में एक अलग आस्था माना जाता है. यहां के पंडित बताते हैं कि यहां माता को पशु की बलि चढ़ाई जाती है और उसी का भोग भी लगता है.

इस बार 50वीं वर्षगांठ
सैफ नगर दुर्गा पूजा की स्थापना 1972 में की गई थी तब से निरंतर यहां भव्य साज-सज्जा के साथ पूजा अर्चना की जाती रही है. लेकिन इस बार कुछ खास हो रहा है. यहां के पूजा पंडालों से लेकर मूर्ति निर्माण तक पूजा समिति के कोषाध्यक्ष बताते हैं कि इस बार हम लोग अपनी 50वीं वर्षगांठ मना रहे हैं. इसको लेकर काफी धूमधाम से तैयारियां चल रही है. पूरा पूजा पंडाल रोशनी से सराबोर दिखेगा. वहीं मंदिर के बगल में तालाब को भी रोशनी से पूरी तरह चाक-चौबंद कर दिए जाएंगे.

आमतौर पर आप लोग मां दुर्गा को सिंह पर सवार देखते होंगे, लेकिन इस बार यहां पूजा समितियों के द्वारा माता की मूर्ति को कुछ विशेष आकार दिया जा रहा है. पूजा समिति के कोषाध्यक्ष ने बताया कि इस बार यहां मां दुर्गा को रथ पर सवार हम लोग दिखा रहे हैं. उस रथ को दो शेर खींच रहे हैं और उनका लगाम मां दुर्गे के हाथों में है. इस तरह की मूर्ति भक्तों को आकर्षित करने के लिए भी बनाया जा रहा है.

श्रद्धालुओं के लिए क्या है व्यवस्था
बता दें कि 26 सितंबर को यहां कलश यात्रा निकलेगी. उसी दिन दोपहर के समय कलश शोभायात्रा भी निकाली जाएगी. जिसमें भारी संख्या में कुमारी कन्याओं के द्वारा भाग लिया जाएगा. वहीं महिला भक्तों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है.

जिसमें खोईचा बढ़ने वाली महिलाओं को कोई भी दिक्कत ना हो इसलिए पूजा समिति पूरी तरह तत्पर और प्रयासरत है.

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