Navratri का कमाल, भागलपुरी सिल्क बाजार में उछाल, 350 पार पहुंचा कारोबार पर बेहाल हैं बुनकर

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रिपोर्ट – शिवम सिंह

भागलपुर. बड़ी खबर है कि पहली बार दुर्गा पूजा में भागलपुरी सिल्क का कारोबार 350 करोड़ के पार होने जा रहा है. दुर्गा पूजा पर 350 करोड़ की सिल्क साड़ियों के ऑर्डर मिलने से बुनकरों में खुशी है. इन्हें उम्मीद है कि कोरोना काल में 2 साल बाद इस बार फिर से सिल्क के कारोबार ने रफ्तार पकड़ ली है, जो आने वाले दिनों में जारी रहेगी. इसमें लाल व पीले रंग की साड़ियों की अधिक डिमांड है. कीमत भी 5 से 15,000 प्रति साड़ी के करीब है. बुनकरों को अब तक लगभग 5 लाख सिल्क साड़ियों के ऑर्डर मिल चुके हैं.

26 सितंबर से दशहरे का पर्व शुरू हो रहा है. सोमवार से शुरू होने के कारण मान्यता के अनुसार इस बार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी. शास्त्रों में इसे प्रजा के सुखी होने का संकेत माना जाता है. भागलपुर में यह दिखने भी लगा है. एक तरफ जहां हज़ारों बुनकरों को रोज़गार मिल रहा है, वहीं पिछले दो साल कोरोना की मार झेल चुके व्यापारियों के लिए इस बार पिछले नुकसान की भरपाई का बड़ा मौका भी है.

कहां की महिलाएं हैं भागलपुरी सिल्क की दीवानी?

सिल्क कारोबार से जुड़े बुनकरों का कहना है कि अब तक मिले साड़ियों के कुल ऑर्डरों में सबसे ज्यादा डेढ़ लाख ऑर्डर अकेले पश्चिम बंगाल से हैं. शेष साड़ियों के आर्डर विभिन्न राज्यों जैसे दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, केरल आदि से हैं. इनका कहना है कि पश्चिम बंगाल की महिलाएं दशहरा पर्व के दौरान भागलपुरी सिल्क की साड़ी बेहद पसंद करती हैं. चूंकि बंगाल में परंपरागत ढंग से बड़े स्तर पर इस पर्व को मनाया जाता है इसलिए यहां परिधान और साज सिंगार का विशेष महत्व भी है. इसी के चलते यहां से डिमांड ज़्यादा है.

कोकून के धागे हुए महंगेए फिर भी खरीदारी टॉप पर

कोरोना काल में कोकून के धागे के दाम में 20 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी हुई. छत्तीसगढ़, झारखंड और उड़ीसा से कोकून के धागे आते हैं. यह महंगा हो गया है. इसके बावजूद खरीदारों में उत्साह है और पारंपरिक परिधान के शौकीन बढ़े दाम पर भी खरीदारी कर रहे हैं. हालांकि कुछ कारोबारी चायनीज धागों का भी इस्तेमाल करते हैं. इस पर रोक लगने का प्रयास भी किया जा रहा है. चायनीज धागे सस्ते होने के कारण कुछ कारोबारी इसका उपयोग धड़ल्ले से कर रहे हैं.

किस रंग की सिल्क साड़ियों की डिमांड ज्यादा?

बुनकरों को मिले ऑर्डरों के मुताबिक लाल और पीले रंग की साड़ियों की डिमांड ज़्यादा है. कहा जाता है कि त्योहारों पर लाल और पीले रंग की साड़ी पहनना महिलाएं शुभ मानतीं हैं. पूजा से पहले शृंगार के समय लाल सिंदूर का टीका, लाल महावर और लाल-पीले रंग की सिल्क साड़ी परंपरा का हिस्सा रही है.

आप भी अगर भागलपुरी सिल्क साड़ी मंगवाना चाहते हैं तो बुनकर और सिल्क परिधान के विक्रेता हेमंत से उनके मोबाइल नंबर 7903605311 पर संपर्क कर सकते हैं.

20 हज़ार बुनकरों को मिला है रोज़गार

भागलपुर ज़िले में करीब 20,000 बुनकर हथकरघा व पावरलूम से रेशमी कपड़े तैयार करते हैं. सिल्क की साड़ियों की चमक महिलाओं को तो खूब लुभाती है, पर इसे तैयार करने वाले बुनकर कई तरह की परेशानियों से भी जूझ रहे हैं. बुनकरों की मुख्य दिक्कत बिजली की कटौती एवं खपत से अधिक मीटर रीडिंग है. बुनकरों से बातचीत करने के दौरान एक ने कहा कि पिछले 2 साल न के बराबर काम हुआ. फिर भी एक समान बिजली बिल नहीं आया. पूंजीपतियों का मुंह ताकना पड़ता है. हमारी मेहनत और खरीदार के बीच की गाढ़ी कमाई बिचौलिए यानी पूंजीपति खा जाते हैं.

Tags: Bhagalpur news, Navratri festival



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