Fear with Money: पैसे के प्रति आपके निगेटिव विचार कहीं बचपन की देन तो नहीं, ऐसे करें सुधार

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Fear with Money, Mental Health:  रुपये पैसे को लेकर सभी लोगों का नजरिया काफी अलग होता है. बिना रुपये के जिंगदी जीने की कल्पना नहीं की जा सकती. लोग अलग अलग तरह से पैसे को महत्व देते हैं, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी है जिनका पैसों के प्रति संबंध काफी तनावग्रस्त होता है. पैसों के साथ उनका रिश्ता काफी संघर्षयुक्त होता है. कई बार लोगों में यह ख्याल आने लगता है कि जो उन्होंने पाया या कमाया है वह उसके लायक नहीं थे. इस तरह के विचार रुपये-पैसे के प्रति आपके संबंधों को खराब कर देते हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार ट्रॉमा रिजॉल्यूशन एक्सपर्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. गौरव डेका कहते हैं कि पैसों के साथ खराब संबंधों की एक सबसे बड़ी वजह हमारे बचपन के अनुभव होते हैं. हम बचपन में जो देखते सुनते हैं या फिर पैसों के प्रति जो व्यवहार हमें दिखाई देता है वही हमारी सोच को प्रभावित करता है.

डॉ. डेका बताते हैं कि पैसे के साथ हमारे कोई लेन देन वाला संबंध नहीं है बजाय भावनात्मक संबंध के. ऐसा इसलिए होता है कि जब हम बच्चे होते हैं और पैसा हमारे भावनात्मक परिदृश्य का हिस्सा बन जाता है और हमारा मस्तिष्क पैसेको लेकर कई तरह के विचार करना शुरू कर देता है और उसी दौर से हमारा भावनात्मक संबंध जुड़ जाता है.

बचपन की घटनाओं को पैसों से जोड़कर देखना
डॉ. डेका के मुताबिक बचपन में हमारे साथ जो भी घटित होता है हम उसे पैसे से जोड़कर देखना शुरू कर देते हैं, फिर चाहे वह सुख हो, दुख हो, अपराध हो, क्रोध हो, या फिर पीड़ा और शर्म की भावना ही क्यों न हो. ये सभी भावनाएं पैसे के बारे में हमारे दृष्टिकोण को प्रभावित करती हैं.

सामाजिक व्यवहार एक बड़ा कारक
हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार कई बार लोगों द्वारा किए गए अपराध की जड़ें उनके बचपन के अनुभव में होती हैं. पैसे को लेकर कई बार बचपन से अजीबोगरीब ख्याल आने लगते हैं इसके पीछे की वजह है उनके साथ किया गया सामाजिक और पारिवारिक व्यवहार. जब बचपन में एक बच्चे से कई बार कहा जाता है कि ‘तुम इसके लायक नहीं हो’ ‘तुम्हे जो मिला वह तुम्हारे लायक नही था’, ‘तुम्हे इसे पाने के लिए और मेहनत करनी पड़ेगी’ ऐसी बातें उस बच्चे के मन में पैसे के प्रति नकारात्मक सोच को जन्म दे देती है.

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यदि कोई बच्चा इन सामाजिक पारिवारिक कथनों पर ध्यान देता है और उन्हें स्वीकार कर लेता है तो वह उसके बड़े होने के बाद भी मन में रहती हैं. जब वह कुछ हासिल करता है तो भी वह ऐसा ही महसूस करता है कि उसने जो पाया जिसका वह हकदार था वह उसके लायक नहीं है.

पैसे के साथ डर की भावना का जन्म लेना
अक्सर लोगों में पैसे के साथ डर की भावना भी विकास कर जाती है. यदि आप हमेशा यही सोचते हैं कि आपके पास पैसे की कमी है और कि अगर वह पैसे खर्च कर देंगे तो उन्हें पैसे की कमी की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. इस तरह का डर भी बचपन से ही हमारे मन में बैठा दिया जाता है जो आपको पूरी जिंदगी तनाव दे सकता है.

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इस तरह के बातें बचनपन में ही बच्चा अपने घर में सुनने और समझने लगता है. बच्चों में यह डर परिवार के बड़े बुजुर्गों की उस मानसिकता को देखने से पनपने लगती है जो हमेशा पैसों की कमी की बात करते रहते थे. वे अक्सर बच्चों के सामने यही दिखाते थे कि उनके पास पर्याप्त मात्रा में पैसे नहीं है और जो हैं उन्हें खर्च नहीं करना चाहिए. इस तरह के बचपन में देखे गए दृश्य बड़े होने तक लोगों को प्रभावित करते हैं और ऐसे लोग हमेशा पैसों की कमी की चिंता में डूबे रहते हैं.

धन के साथ संबंध को कैसे मजबूत करें
पैसों के साथ अपने संबंध को मजबूत करने के लिए डॉ. डेका ने दो महत्वपूर् सुझाव दिए थे.

  • पैसे के साथ अपने तनावग्रस्त संबंध को सुधारने के लिए सबसे अहम और जरूरी बात है कि आपके पैसों के साथ किस भावना से जुड़े हैं. आपको इस बात को पहचानना होगा कि आपके साथ सबसे बुरी स्थिति पैसे के साथ क्या हो सकती है.
  • आपको यह भी जानना होगा कि आपने पैसों के प्रति जो भी भावनाएं बनाई हैं वह किससे सीखी हैं. क्या वे आपको अपने दादा से मिली, माता-पिता से मिलीं, भाई-बहन से मिलीं. एक बार जब आप यह तलाश लेंगें तो आप यह ठीक प्रकार से समझेंगे कि आप जो सोच रहे हैं वह आपकी सोच नहीं है. इस तरह से आप खुद को बदल सकते हैं.

Tags: Health News, Lifestyle, Mental health



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