Churu: हर साल मिलता है बजट, फिर भी घंटाघर की टिक-टिक क्यों है बंद? कारण सुनकर चौंक जाएंगे आप

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चुरू. सफेद घंटाघर शहर की ऐतिहासिक धरोहर तो है ही, आज भी एक लैंडमार्क है. आज भी राहगीरों का एक मुख्य पड़ाव बना हुआ यह घंटाघर 64 साल पहले शहर की लाइफलाइन की तरह था. लोगों की दिनचर्या घंटों की आवाज़ से शुरू होती थी. कहीं बस या ट्रेन से सफर पर जाना हो या कोई और ज़रूरी काम हो, सब कुछ इसी घड़ी की सुई से ही चलता था, लेकिन अब काफी समय से सफेद घंटाघर पर लगी घड़ी बंद पड़ी है. इसे ठीक करवाने के लिए नगर परिषद प्रशासन ही जब यह पूछने लगे कि ‘कैसे सुधारें’ तो समझा जा सकता है कि इतिहास को सहेजने में कितनी रुचि है.



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