राम का नाम, ना करो बदनाम: भारतीय समाज का बाबरी मस्जिद विवाद

भारतीय समाज के इतिहास में एक ऐसा विवाद है जो देश को बांटने के नजदीक ले जा सकता है – बाबरी मस्जिद विवाद। यह एक ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विवाद है जिसमें हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच झगड़ा है। इस विवाद की शुरुआत 16वीं सदी में हुई जब मुग़ल सम्राट बाबर ने अयोध्या में राम मंदिर को तोड़कर अपनी मस्जिद बनवाई थी। यह मस्जिद संघर्ष का केंद्र बन गई और धीरे-धीरे इस विवाद ने राष्ट्रीय रूप ले लिया।

विवाद का पीछा कार्यक्रम

विवाद का पीछा कार्यक्रम 1984 में शुरू हुआ जब हिंदू संगठन विश्व हिन्दू परिषद ने बाबरी मस्जिद के नीचे राम मंदिर का निर्माण करने की मांग की। इसके बाद से हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच टकराव शुरू हो गया और यह विवाद राष्ट्रीय विवाद बन गया। इस विवाद के बारे में कई कोर्ट के फैसले हुए, जमीनी मामलों में भी फैसले हुए और न्यायालयों ने इस संबंध में कई ऑर्डर जारी किए। हालांकि, इस विवाद के बावजूद अब तक अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

विवाद की राजनीति

बाबरी मस्जिद विवाद एक धार्मिक मुद्दा होने के साथ-साथ राजनीतिक विवाद भी है। इस विवाद को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया है और अब तक कई नेताओं ने इसे अपने राजनीतिक एजेंडे में शामिल किया है। विवाद के दौरान कई संघर्ष की घटनाएं हुईं और यह विवाद आज भी देश को विभाजित करने में सक्षम है। यह विवाद हिंदुत्व और सेकुलरिज्म के बीच एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है और देश के भागीदारों के इरादों को बदल सकता है।

विवाद का न्यायिक मामला

विवाद के दौरान कई कोर्ट में विवाद के बारे में विचाराधीनता रही है। सबसे पहले, 1986 में सुप्रीम कोर्ट ने दिया था कि बाबरी मस्जिद वहाँ बनाई जाए और हिंदुओं को दूसरी जगह पर राम मंदिर बनाने की अनुमति दी जाए। हालांकि, इस फैसले पर इतराज़ किया गया और इसके बाद कई कोर्टों ने इस मामले पर फैसले दिए। हालांकि, अब तक एक अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

आरपार में घर की लड़ाई
आरपार में घर की लड़ाई

विवाद का सामाजिक पक्ष

बाबरी मस्जिद विवाद ने देश के सामाजिक तथा सांस्कृतिक संरचना को गहराई से प्रभावित किया है। यह विवाद हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच अस्थायी दूरी बढ़ा दिया है और इसका संघर्ष राष्ट्रीय विवाद बना दिया है। इस विवाद ने धार्मिक तोड़-फोड़ को बढ़ावा दिया है और देश में बांट और हिंसा को बढ़ावा दिया है।

निष्कर्ष

बाबरी मस्जिद विवाद एक ऐसा मुद्दा है जो देश को गहराई से विभाजित कर सकता है। इस विवाद का न्यायिक, धार्मिक और सामाजिक पक्ष है और इसे सुलझाने के लिए संघर्ष की आवश्यकता है। सभी समुदायों को मिलकर समस्या का समाधान ढूंढना चाहिए और सद्भावना, समझदारी और धैर्य के साथ इस मुद्दे को हल करना चाहिए।

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