रणथंभौर टाइगर रिजर्व: हाफ-डे और फुल-डे जंगल सफारी पर लगा बैन, पर्यटकों को मिलेंगे ये 2 विकल्प

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जयपुर. रणथम्भौर टाइगर रिजर्व (Ranthambore Tiger Reserve) में जंगल का आनंद उठाने के लिए वाले पर्यटकों को वन विभाग ने बड़ा झटका दिया है. रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में अब फुल-डे और हाफ-डे जंगल सफारी (Half-day and Full-day Jungle Safari banned) नहीं कराई जाएगी. इसको लेकर वन विभाग ने विधिवत फरमान जारी कर दिया है. इसमें कहा गया है कि जो पर्यटक पहले से फुल-डे और हाफ-डे जंगल सफारी बुक करा चुके हैं उन्हें भी अब उस रूप में जंगल सफारी नहीं कराएगी. उन लोगों को इसके बदले में नॉर्मल सफारी की बुकिंग करने या फिर बुकिंग की पूरी राशि के रिफंड का विकल्प दिया गया है. बताया जा रहा है कि इस आदेश का असर जल्द ही राजस्थान के अन्य रिजर्व पर भी देखने को मिलेगा.

राजस्थान वन विभाग के प्रमुख सचिव शिखर अग्रवाल की ओर से जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि इस मामले में 1 सितंबर को आदेश जारी कर दिया गया था. अब वन विभाग की ओर से इस मामले में पूर्व में बुकिंग करा चुके पर्यटकों को दो विकल्प दिए जा रहे हैं. पहले विकल्प में हाफ-डे जंगल सफारी बुक कराने वाले पर्यटकों को उसी दिन सुबह या शाम की पारी में जंगल सफारी का विकल्प दिया जाएगा जिस दिन के लिए उन्होंने सफारी बुक की थी.

पर्यटकों को दिए जाएंगे ये विकल्प
वहीं फुल-डे जंगल सफारी बुक कराने वाले पर्यटकों को उसी दिन सुबह और शाम दोनों पारियों में जंगल सफारी का विकल्प दिया जाएगा. इन दोनों ही विकल्पों में पर्यटकों को जंगल सफारी के बाद उनके की ओर से अदा की गई कुल राशि में से सुबह और शाम की जंगल सफारी के बाद बची हुई राशि वापस कर दी जाएगी. वहीं ऐसे पर्यटक जो फुल-डे और हाफ-डे के बदले में नॉर्मल जंगल सफारी में रुचि नहीं दिखाते हैं उनको उनके द्वारा अदा की गई पूरी राशि रिफंड कर दी जाएगी. इस आदेश से वन विभाग ने यह बात एकदम साफ कर दी है कि आगामी 1 अक्टूबर से जो पर्यटन सत्र शुरू होगा उसमे फुल-डे और हाफ-डे जंगल सफारी पहले से बुक करा चुके पर्यटकों को भी नहीं कराई जाएगी.

यह रही बंद करने की वजह
उल्लेखनीय है कि पिछले काफी समय से वन्यजीव एवं पर्यावरण प्रेमी हाफ-डे और फुल-डे जंगल सफारी का विरोध कर रहे थे. हाफ-डे जंगल सफारी में पर्यटक 6 घंटे और फुल-डे सफारी में 12 घंटे जंगल में रह सकता था. लेकिन माना जा रहा है जंगल में इंसानों की ज्यादा देर उपस्थिति से वन्यजीवों पर नकारात्मक असर पड़ता है. इससे वन्यजीव डिस्टर्ब होते हैं. उनमें तनाव बढ़ता रहा है. इसका असर प्रजनन पर भी पड़ता है. इसके साथ ही कई अन्य साइड इफेक्ट भी सामने आते हैं. इन सबको देखते हुये वन विभाग ने यह कदम उठाया है.

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