ये इंसानियत है! 18 साल से बेड़ियों में जकड़ी जिंदगी, गांव से लेकर तहसील तक नहीं पिघला किसी का दिल!

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रिपोर्ट – पुष्पेंद्र मीणा

दौसा. एक आदमी बेड़ियों से बंधा रहता है. जानवरों के साथ, जानवरों की ही तरह. जानवरों के साथ ही खाता और सोता-जागता है. और इस आदमी की यह हालत पिछले करीब 18 सालों से है. उसके परिवार ने ही उसे इस तरह रखा हुआ है. ऐसा नहीं कि यह किसी जुर्म की सज़ा हो, बल्कि इस आदमी की मानसिक हालत कुछ ऐसी तरह की है कि उसका परिवार उसे खुला छोड़ने का जोखिम नहीं लेता. इस विक्षिप्त व्यक्ति के इलाज के बारे में प्रशासन को जानकारी नहीं है और परिवार का कहना है कि सरकारी योजनाओं में आर्थिक मदद के लिए हाथ-पैर मारकर वो थक चुके हैं, कहीं से कोई रास्ता नहीं खुला.

सिकराय तहसील के नाहरखोहरा गांव में कैलाश मीणा पिछले 17-18 सालों से बेड़ियों से बंधा हुआ है. कैलाश की पत्नी भजनो का कहना है कैलाश की मानसिक स्थिति खराब होने के बाद उसे जयपुर के मनोरोग अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया था, लेकिन परिवार के आर्थिक हालात खराब होने के कारण लंबा इलाज नहीं हो सका. कैलाश चूंकि परिवार का मुखिया था और वही बीमार हुआ तो परिवार की आर्थिकी भी बिगड़ी. इलाज न होने से मानसिक स्थिति दिनबदिन खराब और वह खूंखार मनोरोगी बन गया.

सालों हो गए, कब मिलेगी मदद?

कैलाश कभी भूल से खुल जाता है तो लोगों की जान की आफत हो जाती है. वह राह चलते लोगों पर पत्थर हमला करके कुछ एक दफ़ा लोगों को घायल भी कर चुका है. लोग उसके घर की तरफ रास्ता लेने से भी गांव में डरते हैं. घर के मुखिया की यह हालत हो जाने के बाद दिनोंदिन परिवार की स्थिति कमज़ोर होती जा रही है और पूरे परिवार को ही मेहनत मज़दूरी करनी पड़ती है. इन दर्दनाक हालात के बावजूद न तो गांव से इस परिवार की मदद के लिए कोई आगे आया, न ही किसी सरकारी विभाग की नज़र पड़ी.

सिकराय के ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. अमित मीणा ने कहा, ‘हमारी जानकारी में यह मामला नहीं है. ऐसी स्थिति में कोई व्यक्ति है और सरकार की किसी योजना के अनुसार उसका इलाज हो सकता है, तो इलाज ज़रूर करवाया जाएगा.’

Tags: Dausa news, Mental health



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