पिथौरागढ़: पहाड़ों में ग्रामीणों के जानवरों का नहीं हो रहा इलाज, पशु अस्पताल में नहीं हैं डॉक्टर!

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हिमांशु जोशी

पिथौरागढ़. उत्तराखंड का पिथौरागढ़ जिला पर्वतीय क्षेत्र होने के साथ मुख्य रूप से कृषि और पशुपालन से जुड़ा है. यहां ग्रामीण अंचलों में रहने वाली आबादी की आजीविका का मुख्य साधन पशुपालन है. यहां पशुओं की संख्या अधिक होने के कारण उनमें बीमारियों का खतरा भी ज्यादा रहता है. पशुओं के बीमार हो जाने पर ग्रामीणों की समस्याएं काफी बढ़ जाती हैं क्योंकि जिले के पशु अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी है. ऐसे में ग्रामीणों को अपने मवेशियों के इलाज और दवाइयों के लिए जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है.

दूध बेचकर गुजारा करने वाले ग्रामीण पशु चिकित्सक और अन्य कोई सुविधा नहीं मिलने से हताश हैं. इसको लेकर अब उन्हें अनशन करना पड़ रहा है. मुनस्यारी क्षेत्र के ग्रामीण और जनप्रतिनिधि यहां के पशु-अस्पताल में डॉक्टरों के पद भरे जाने को लेकर पिछले एक हफ्ते से अनशन पर बैठे हैं. उनका कहना है कि लंबे समय से मुनस्यारी व मदकोट में पशु चिकित्सक का पद खाली है. यहां अस्पताल तो खोल दिया गया है, लेकिन उसमें अभी तक कोई डॉक्टर और कर्मचारी तैनात नहीं किया गया है.

वहीं, पिथौरागढ़ के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. योगेश भारद्वाज ने बताया कि जिले में पशु चिकित्सा अधिकारी के 15 पद, फार्मासिस्ट के 33 पदों के सापेक्ष आठ पद, और पशुधन प्रसार अधिकारी के 86 के सापेक्ष 59 पद रिक्त चल रहे हैं, जिन्हें भरे जाने के संबंध में शासन से पत्राचार किया गया है. उम्मीद है कि जल्द सभी पदों पर नियुक्तियां हो जाएंगी.

बता दें कि ग्रामीण इलाकों में पशुओं का इलाज न हो पाने से जिला मुख्यालय पर काफी दबाव बढ़ता है. ग्रामीण दूर-दराज से यहां अपने पशुओं के लिए दवाइयां लेने पहुंचते हैं, जो उनके लिए बेहद खर्चीला साबित होता है. पिथौरागढ़ के विधायक मयूख महर ने सरकार से पहाड़ी क्षेत्रों की स्थिति समझते हुए रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरने की मांग की है.

Tags: Animal Farming, Pithoragarh news, Uttarakhand news



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