धारचूला: न कॉपी, न किताब और न स्कूल ड्रेस, आपदा प्रभावित खोतिला गांव के बच्चों का क्या होगा भविष्य?

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हिमांशु जोशी

पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला के खोतिला गांव में कुदरत के बरसाए कहर को 10 दिन से ज्यादा समय हो गये हैं. यहां आई आपदा में बेघर हुए लोग धारचूला के स्पोर्ट्स स्टेडियम में एक हॉल में रहने को मजबूर हैं. पीड़ितों का सारा सामान मलबे में दब गया है और अब उनके पास रहने की जगह नहीं बची है. स्पोर्ट्स स्टेडियम के हॉल में 50 से ज्यादा परिवार रह रहे हैं. इनमें 36 बच्चे ऐसे हैं, जो स्कूल पढ़ने तो जा रहे हैं, लेकिन उनके पास न कॉपी है, न किताबें हैं और न ही स्कूल की यूनिफॉर्म है. ऐसे में यह बच्चे काफी असहज महसूस कर रहे हैं. इसका असर उनके भविष्य पर पड़ रहा है.

आपदा में यह मासूम अपना सब कुछ खो चुके हैं. जो बच्चे कभी पूरे गांव में दौड़ लगाते फिरते थे, अब यहां एक कमरे में सिमट कर रहने को मजबूर हैं. साथ ही बिना कॉपी-किताबों के उनकी पढ़ाई हो रही है. इनके विस्थापन के लिए कार्रवाई जारी है, लेकिन किसी को नहीं पता कि इसमें कितना समय और लगेगा. परिजनों को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है.

आपदा में अपना घर-बार खोने वाले तेज बहादुर बताते हैं कि वो मजदूरी कर के अपने परिवार का पेट पालते हैं. उनका बच्चा कक्षा छह में पढ़ता है, जो बिना कॉपी-किताब और स्कूल ड्रेस के स्कूल जा रहा है, इससे उसे अन्य छात्रों के बीच पढ़ने में काफी असहज महसूस हो रहा है.

खोतिला में आई आपदा के बाद स्टेडियम में रह रहे लोग काफी मजबूर हैं. एक कमरे में इतने सारे लोगों का रहना उन्हें कैद जैसा लग रहा है, लेकिन हालात के सामने विवश हैं. सुनहरे भविष्य का सपना संजोए सभी आपदा प्रभावितों को विस्थापन का इंतजार है. पीड़ितों के पास उम्मीद के सिवा और कुछ नहीं बचा है. यहां लोग सरकार से जल्द उनकी घर वापसी की मांग कर रहे हैं, जिससे बेपटरी हो चुकी उनकी जिंदगी की फिर से शुरुआत हो सके.

Tags: Pithoragarh news, Rehabilitation Plan Approval, Relief Camp, Uttarakhand news



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