…तो छोड़ देंगे CM की कुर्सी! अशोक गहलोत बोले- 2 पोस्ट रखना कांग्रेस अध्यक्ष पद के साथ न्याय नहीं होगा

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नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव की रणभेरी बज चुकी है. गांधी परिवार के पसंदीदा उम्मीदवार माने जा रहे राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नामांकन भरने का ऐलान कर इस बात का भी इशारा कर दिया है कि वह कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी खाली कर देंगे. दरअसल, बीते दिनों अशोक गहलोत ने साफ कर दिया था कि वह कांग्रेस अध्यक्ष चुने जाने के बाद भी मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ेंगे, मगर राहुल गांधी के ‘एक आदमी एक पद’ वाले बयान के बाद गहलोत के सुर बदल गए. राहुल गांधी ने गुरुवार को कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए ‘एक व्यक्ति-एक पद’ प्रतिबद्धता का पालन किया जाएगा.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कांग्रेस के उदयपुर घोषणापत्र में निर्धारित सिद्धांत नॉमिनेटेड पदों के लिए थे, न कि उन पदों के लिए जिनके लिए चुनाव होते हैं. हालांकि, उन्होंने कहा कि एक आदमी का एक साथ दो पद रखना न्याय नहीं होगा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष पद पर निर्वाचित होने वाला नेता अगर दो पदों पर है तो वह कांग्रेस अध्यक्ष पद के साथ न्याय नहीं कर पाएगा. बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए 22 साल बाद चुनावी मुकाबले की प्रबल संभावना के बीच गुरुवार को अधिसूचना जारी कर दी गई और इसी के साथ चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई.

चुनाव से सोनिया गांधी खुद को रखेंगी न्यूट्रल
सोनिया गांधी से मुलाकात और अध्यक्ष पद के दावेदारों के सवाल पर अशोक गहलोत ने कहा कि सोनिया गांधी ने कहा है कि हम न्यूट्रल रहेंगे और गांधी परिवार से कोई भी चुनाव नहीं लड़ेगा. और नन-गांधी की बात है तो फिर अच्छा रहेगा जो भी मैदान में उतरना चाहे, उतर जाए. यह पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र के लिए अच्छा है. हमने नेशनल पॉलिटिक्स, राहुल गांधी (भारत जोड़ो यात्रा) और अध्यक्ष पद के चुनाव पर चर्चा की और वह खुद को न्यूट्रल रखना चाहती हैं. सोनिया गांधी किसी भी कैंडिडेट के नामांकन पत्र में प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर नहीं करेंगी. मैं उनसे केवल इसलिए मिला, क्योंकि मैं आशीर्वाद लेना चाहता था.

गहलोत भरेंगे नामांकन फॉर्म
जयराम रमेश के हवाले से राहुल गांधी के चुनाव नहीं लड़ने के सवाल पर अशोक गहलोत ने कहा कि मेरी जानकारी में यह बात आई है कि उन्होंने (जयराम) ऐसा कहा है कि राहुल गांधी चुनाव नहीं लड़ेंगे. तब भी मैं मांग करता रहा हूं कि राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बनें. राजस्थान में सबसे पहले मैंने ही यह मांग उठाई थी. मुझे लगता है कि उनसे आखिरी बार बात करना अभी भी मेरी जिम्मेदारी है. अगर राहुल गांधी रेस में शामिल नहीं होते हैं तो फिर आप नामांकन दाखिल करेंगे, इस सवाल पर गहलोत ने कहा कि अगर राहुल गांधी चुनाव लड़ने के लिए राजी नहीं होते हैं तो फिर हम फॉर्म भरेंगे. उन्होंने आगे कहा कि जब राज्य और देश में मेरे पक्ष में मूड होगा तो मुझे सबकी भावनाओं का सम्मान करते हुए नामांकन दाखिल करना होगा.

…तो सीएम की कुर्सी खाल कर देंगे गहलोत?
दिग्विजय सिंह के उस बयान पर भी अशोक गहलोत ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि गहलोत दो पद एक साथ नहीं रख सकते. अशोक गहलोत ने कहा कि यह मैं केवल अपने लिए नहीं कह रहा हूं. यह चुनाव कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए है और इस चुनाव में दो पद का मुद्दा नहीं उठ सकता. चुनाव कोई भी लड़ सकता है. कोई भी स्टेट मिनिस्टर जो एक प्रतिनिधि है, चुनाव लड़ सकता है. इसके लिए उसे पहले इस्तीफा देने की कोई जरूरत नहीं है. मगर जब वह कांग्रेस अध्यक्ष बनता है तो उसका क्षेत्र पूरा दश होगा. इसलिए इतिहास में ऐसा कभी कोई मामला नहीं आया, जब कोई शख्स एक साथ कांग्रेस का अध्यक्ष भी रहा हो और किसी राज्य का मुख्यमंत्री भी. अगर ऐसा होता है तो वह शख्स कांग्रेस अध्यक्ष पद के साथ न्याय नहीं कर पाएगा. इसलिए इस दृष्टिकोण से यह स्वाभाविक है कि वह कांग्रेस प्रेसीडेंट रहके काम करे. हालांकि, तब भी यहां इस मामले में दो पद का मामला लागू नहीं होता. उन्होंने आगे कहा कि राजस्थान में विधानसभा चुनाव जीतना भी हमारे लिए जरूरी है, तभी कांग्रेस का रिवाइवल शुरू होगा.

कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए कब है चुनाव
कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए घोषित कार्यक्रम के अनुसार, अधिसूचना जारी होने के बाद अब नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया 24 से 30 सितंबर तक चलेगी. नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि आठ अक्टूबर है. एक से अधिक उम्मीदवार होने पर 17 अक्टूबर को मतदान होगा और नतीजे 19 अक्टूबर को घोषित किये जाएंगे. बता दें कि 22 साल बाद देश की सबसे पुरानी पार्टी का प्रमुख चुनाव के जरिये चुना जाएगा. वर्ष 2000 में सोनिया गांधी और जितेंद्र प्रसाद के बीच मुकाबला हुआ था जिसमें प्रसाद को करारी शिकस्त मिली थी. इससे पहले, 1997 में सीताराम केसरी, शरद पवार और राजेश पायलट के बीच अध्यक्ष पद को लेकर मुकाबला हुआ था जिसमें केसरी जीते थे.

Tags: Ashok gehlot, Congress, Rahul gandhi



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