चीनी वैज्ञानिकों का कमाल! बनाया दुनिया का पहला क्लोन आर्कटिक भेड़िया, नाम दिया ‘माया’

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हाइलाइट्स

चीन में वैज्ञानिकों ने सफलतापूर्वक दुनिया का पहला क्लोन आर्कटिक भेड़िया बनाया है.
भेड़िया के जन्म के 100 दिन बाद सोमवार को इसकी घोषणा की गई है.
क्लोन किया जाने वाला पहला जानवर 1996 में डॉली भेड़ था.

नई दिल्ली. चीन में वैज्ञानिकों ने सफलतापूर्वक दुनिया का पहला क्लोन आर्कटिक भेड़िया बनाया है. आर्कटिक भेड़िया को व्हाइट वुल्फ या पोलर वुल्फ के रूप में भी जाना जाता है. बायोटेक्नोलॉजी में नए प्रयोग करते हुए बीजिंग स्थित फर्म सिनोजेन बायोटेक्नोलॉजी कंपनी अंतिम परिणाम प्राप्त करने में सफल रही. तकनीक का यह प्रयोग जानवर की क्लोनिंग, दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है.

ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार फर्म ने भेड़िया के जन्म के 100 दिन बाद सोमवार को इसकी घोषणा की. 10 जून को जन्मी माया नाम की भेड़िया बहुत अच्छे स्वास्थ्य में है. सिनोजेन बायोटेक्नोलॉजी कंपनी के महाप्रबंधक एमआई जिदोंग ने बीजिंग में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि लुप्तप्राय जानवर को बचाने के लिए उन्होंने 2020 में आर्कटिक भेड़िए की क्लोनिंग पर हार्बिन पोलरलैंड के साथ रिसर्च शुरू की थी. दो साल के प्रयासों के बाद, आर्कटिक भेड़िये को सफलतापूर्वक क्लोन किया गया है.

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने कहा कि माया नाम का 16 वर्षीय आर्कटिक भेड़िए की पिछले साल अगस्त में मौत हो गई थी. क्लोन भेड़िये की डोनर सेल इसी भेड़िए से ली गई थी और उसकी अंडाणु मादा कुत्ते से ली गई थी. ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक माया की सरोगेट मां एक बीगल कुत्ते की नस्ल थी. कुत्ते को सरोगेट के रूप में इसलिए चुना गया क्योंकि यह प्राचीन भेड़ियों के साथ आनुवंशिक वंश साझा करता है और इसलिए क्लोनिंग की सफलता का ज्यादा चांस था.

यह पहली बार नहीं है जब चीनी फर्म ने किसी जानवर का क्लोन बनाया है. 2019 में इसने इसी तरह की तकनीक का उपयोग करके एक बिल्ली का क्लोन बनाया था. क्लोन किया जाने वाला पहला जानवर 1996 में डॉली भेड़ था. इसकी मौत फरवरी, 2003 में फेफड़ों के संक्रमण से हो गई थी.

Tags: China, Science news





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