उप राष्ट्रपति चुनाव 2022: वकालत से करियर की शुरुआत, बनाया खास रिकॉड, पढ़ें जगदीप धनखड़ की कहानी

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हाइलाइट्स

1951 में झुंझूनूं जिले के गांव किठाना में जगदीप धनखड़ का जन्म हुआ
जगदीप धनखड़ ने 1979 में अपने वकालत करियर की शुरुआत की थी
फौजदारी और इंटरनेशनल आर्बिटेशन के मामलों के वे मास्टर थे

जयपुर- देश के उप राष्ट्रपति पद के लिए शनिवार को चुनाव होने है. राजस्थान के जगदीप धनखड़ को एनडीए ने अपना प्रत्याशी बनाया है. प्रदेश से तालूक रखने वाले जगदीप धनखड़ पेशे से अधिवक्ता रहे हैं. उन्होंने जयपुर से ही अपने वकालत करियर की शुरुआत की. साल 1951 में झुंझूनूं जिले के गांव किठाना में जन्में जगदीप धनखड़ मूलत राजस्थानी है. राजनीति से पहले धनखड़ वकालत में अपनी धाक जमा चुके हे. धनखड़ ने 1979 में अपने वकालत करियर की शुरुआत की थी. उनके जूनियर रहे और वर्तमान में राजस्थान हाई कोर्ट में एडिश्नल सॉलिसिटर जनरल आरडी रस्तोगी धनखड़ को वकालत में अपना गुरू मानते हैं. वे कहते हैं कि उनमें वकालत का जूनून था. उनकी जैसी वकालत आज तक किसी की नहीं रही. फौजदारी और इंटरनेशनल आर्बिटेशन के मामलों के वे मास्टर थे.

हाईकोर्ट बार के पूर्व महासचिव प्रहलाद शर्मा बताते है कि जगदीप धनखड़ ने 1979 में वकालत की शुरुआत की थी. लेकिन वे 35 साल की उम्र में सबसे यंगेस्ट हाई कोर्ट बार के अध्यक्ष बने. वहीं सबसे यंगेस्ट सीनियर एडवोकेट डेजिग्नेटेड होने का रिकोर्ड भी उन्हीं के नाम दर्ज है. 1990 में वे वरिष्ठ अधिवक्ता हो गए थे. वे बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के सदस्य भी निर्वाचित हुए. वकालत के उनके जूनियर रहे कई अधिवक्ता आज बड़े पदों पर हैं. इनके जूनियर रहे जस्टिस आरएस चौहान मुख्य न्यायाधीश पद से रिटायर हुए. वहीं जस्टिस एसपी शर्मा पटना हाईकोर्ट में जज़ हैं, वे भी धनखड़ के जूनियर रहे. वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता आरडी रस्तोगी हाईकोर्ट में एडिश्नल सॉलिसिटर जनरल हैं तो वरिष्ठ अधिवक्ता एनए नकवी भी इनके जूनियर रहे.

राज्यपाल बनने से पहले तक करते रहे वकालत
इनके एक और जूनियर और रिश्ते में जगदीप धनखड़ के साले प्रवीण बलवदा आज भी उसी चैम्बर से अपनी वकालत करते हैं, जहां राजनीति में जाने से पहले जगदीप धनखड़ वकालत किया करते थे. इनके चैम्बर में आज भी लॉ की वे किताबें मौजूद है, जिन्हें पढ़कर जगदीप धनखड़ ने वकालत में अपना लोहा मनवाया.

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प्रवीण बलवदा बताते हैं कि जगदीप धनखड़ की वकालत किस तरह की थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उस जमाने में उनके साथ 30 से 35 वकील काम करते थे. किसी क्लाइंट के आ जाने पर उसे बैठाने के लिए उनके जूनियर को सीट छोड़नी पड़ती थी. वहीं पश्चिम बंगाल के राज्यपाल की शपथ लेने से पहले तक उन्होंने कई महत्वपूर्ण केसों में पैरवी की. वकालत के आखिरी दिनों में वे कॉरपोरेट लॉ के केसेज लड़ रहे थे.

Tags: Jagdeep Dhankhar, Jaipur news, Rajasthan news



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